आदर्श और जीवन

सुन्दर यह धरा, सुन्दर चराचर जगत

सुन्दर जगत की हर रचना, सुन्दर इस धरा का हर धाम

सुन्दर व्यक्तित्व से आदर्श से भरा पड़ा यह सुन्दर जहान

कौन कहता इस जीवन में इस जगत में कुछ नहीं

जीवन में यहीं संभावनाएं भी, यहीं कल्पना भी

यहीं आदर्श भी, यहीं यथार्थ भी

और यहीं अन्तिम सार भी

फिर जीवन कैसे हो सकता शून्य

मानव जीवन नहीं परिपूर्ण, बनाना पड़ता स्वयं संपूर्ण

कही भावनाओं में उलझ कर, संघर्ष में टकरा कर

वेदना में झूलस कर

द्वंद्व में उलझकर जीवन का वास्तविक मर्म दिखता

जब हो जाता जीवन शून्य, महान आदर्श देते जीवन को सही दिशा

जो है आदर्श वह है समस्त द्वंद्व के संघर्ष के प्रमाण

आदर्श जीवन का सुन्दर सार

किंतु आदर्श जीवन का मिथ्याचार

आदर्श जीवन को आगे ले जाता

कटु आदर्श जीवन को पीछे धकेल देता

पितामह त्रिवम का आदर्श, प्राण जाए बच्चन न टूटे

श्रीकृष्ण का आदर्श प्रतिज्ञा टूट जाए पर मानवता न टूटे

है जहाँ आदर्श कोरे सिद्धान्तों में बंधा

वहाँ जीवन संघर्षों में डूबा

आदर्श वही जो मानवता के साथ जुड़ा

आदर्श वही जो जीवन को आगे ले चला

परंपरा नहीं आदर्श जो मानवता को पीछे धकेले

आदर्श वही जो जीवन को

चराचर जगत को प्राण देकर चले

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