एक ब्यंग्य ‘‘होरी‘‘

होरी आयो, होरी आयो, होरी आयो रे

नमो बरसा दो रंग गुलाल बजट में, होरी आयो रे

भूपे.. बरसा दो भंग-गुलाल बजट में, होरी आयो रे।।

अबकी होरि तुम रंग भीगो, फीको देश महान रे

आपणो हिस्सों खीर-मलाई, बांटो छाछ जहान रे

बड़े बड़े आश्वाशन-भाषण मन भरमायो रे।।बजट में।।

आदिवासी-गांव-शहर के हिस्सों में आश्वाशन आयो

जनरल औ ओबीसी ठाढ़े, भाषण सुन सुन खूब पचायो

रोटी कपड़ा मकान घटा, मोबाइल बढ़ायो रे।बजट में।

मांगन के मौकोपर भायो तुम टॉमी सो पुंछ हिलायो

देवन के जो मौको आयो तब पिछवाड़ा खूब दिखायो

कुर्सी-टोपी-वरदी भिगण को रंग बरसायो रे। । बजट में।

बाढ़ आवे महामारी आवे, आंधी तूफान देहातों में

हत्या चोरी अनाचार बढ़े तो जन भरमायो बातों में

मत बटोरने, पीर निवारण शिविर लगायो रे।। बजट में।।

बेच दियो मोरा खेत बगीचो,फैक्ट्री पावर प्लांट रे

हरियाली चर गई चिमनियां,फसलें ठेंगा चाट रे

अमरीका से ड्राई फूड खरीदें वो दिन आयो रे।

बजट में होरी…..

वोट बैंक को करने तगड़ा, विपक्षी को देने रगड़ा

वतन-अमन को ताक में रख टी वी में तू कर्ता भांगड़ा

नेता सारो रंग बाँट, हमें चुनोलगायो रे।।

न मो बरसादो रंग गुलाल बजट में होरिआयो रे।

रमन बरसा दो भंग गुलाल बजट में होरी आयो रे।।

भूपे…….

लाठी से पीटा,सड़क में घसीटा,कोरोना बेचा कोरोना खरीदा!!

खरब पति हुए बेच के वैक्सीन‘‘अरब पति हुए खरीद के वैक्सीन

उद्योगपतियों ने लूटे खजाने,सब फंड पचायो रे….

नमो बरसादो, रंग गुलाल….

भूपे.. बरसादो भंग……

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