कुछ शायरी

1. कल फिर लिखी एक ख़्वाहिश..और जला दी

ज़िंदगी के एक और ख़्वाब को आग लगा दी

2. बे तरतीब थी ज़िंदगी..अब कुछ यूँ सज़ा रखी हैं

सिर्फ़ एक ज़ेब में नोट.. बाक़ी में दुआएँ कमा रखी हैं

3. दिल्लगी के लिए एक सबाब ज़रूर करना

मिले जो कही पुराना आशिक़ उसे आदाब ज़रूर करना

4. कोरे पन्ने पर हमने अपनी आशिक़ी सजा दी

कतरा कतरा पढ़ा तुम्हें और ग़ज़ल बना दी

5. अफ़सोस क्या करे की क्या क्या मिला नहीं

उफ़्फ़…. मिला तो आज तक खुद भी नहीं

6. नापने समुँद्र की गहराई समुँद्र में ही जाना होगा

और छोड़ो मेरी हंसती आँखे ..छोड़ो दुनिया की ये बातें

जानना हैं मुझे.. तो कुछ वक्त मेरे साथ बिताना होगा

7. मुरझाने लगे हो? .. हैं ..फिर से खिलना आना हमारे शहर और हमसे मिलना

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