कोरोना का जहर

कोरोना की जहर चली है

रोग-मौत से‘‘कैद‘‘भली है।

कौन डगर में निकले बच्चू

सड़क-पुलिस की लट्ठ खुली है।

सरहद सेना-सड़क सिपाही

घर में जीवन फली-फूली है।

मीत-प्रीत सब दूर हुए हैं

संबंधों की तंग गली है…।

मानवता मुस्काती है अब

मन्दिर-मस्जिद-दान…खुली हैं।

सब जन‘‘बन्द‘‘स्वीकार करें तो

कोरोना की ….उम्र ढली है।

मुंह मे माश्क,हाथो दास्ताने

स्वास्थ्य सेवा ने कमान ली है।

वाट्सप-फेसबुक मनमाने

जो दहशत-अफवाह फैली है!!

हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई

कर्फ्यू सबको बहुत खली है!!!

विश्व है डूबा रोग में‘‘साँई‘‘

देश की हालत फिर भी-भली है।

मंत्री-अफसर-देश की पब्लिक

एक हुए ..जिंदगी खिली है।।

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