बाबू जी और माँ…

मेरी आमद ये तन-मन जान मेरे बाबू जी और माँ,

मेरी इज्जत मेरा सम्मान  मेरे बाबू जी और माँ।।

मेरे भोजन-वसन-सामान मेरे बाबू जी ओर मां,

जीवन-खेल के मैदान मेरे बाबू जी और माँ।

ठोकर जब लगी तो वो दवा भी और दुवा भी थे

धड़कन-सांसो पर अहसान मेरे बाबू जी और माँ।।

निडर-दुस्साहसी,पल में मिला जो चाहिए होता

मेरी ताकत मेरी पहचान,मेरे बाबू जी और माँ।।

मूंछें ऐंठकर हर मुश्किलों को यूं मिटा देते

ममता बांटते मुस्कान.. मेरे बाबू जी और माँ।।

घर की नींव में छत में मिले मेहनत के किस्से हैं

घर की जान-घर के शान मेरे बाबुजी और माँ।।

जिया-खेला-बढा-लिखा-पढ़ा-ओढ़ा-बिछाया भी

धरा-क्षितिज भीऔआसमान मेरे बाबू जीऔर माँ।

मेरे मन्दिर-मेरे मस्जिद-मेरे गुरुद्वार-चर्च भी

खुदा-रब और गुरु भगवान मेरे बाबू जीऔर माँ।।

छूकर पैर जिनके दुनिया की हर रण विजय होता

हिम्मत-जीत के वरदान मेरे बाबू जी और माँ।।

धन -वैभव और सुख सम्पत्ति है बेकार उनके बिन

वही शोहरत औ दौलत-मान मेरे बाबू जी और माँ।

किन्ही सद्कर्मो के फल थे जो उनकी गोद मे आया मेरे अभिमान-जीवन दान मेरे बाबू जी और माँ।।

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