मन मोरा अटके

काहे री सतावै मोहे, जिया मोरा भटके।

जिय मोरा भटके री, मन मोरा अटके।।

काहे री सतावै मोहे…..।।

देखि-देखि तरसूं  रे तोरी या चुनरिया,

मोरे मन भाय गयी तोरी या मुदरिया।

तोरी या मुदरिया हाँ तोरी या मुदरिया।।

काहे री सतावै मोहे…।।

मोरा मन अटक्यो री बरना कै लट पै,

लागै मोहे डर अब जमुना कै तट पै।

जमुना कै तट पै हाँ जमुना कै तट पै।।

काहे री सतावै मोहे…।।

गोरी-गोरी लागै री ये तोरी या वदनिया,

गोरी तोहे देहों हम प्यारी सी निसनियां।

नीकी सी निसनियाँ हाँ नीकी सी निसनिया।।

काहे री सतावै मोहे…।।

काहे रूठी-रूठी लागै मोरी या सजनिया,

सांझ मैं सुनाऊँ तोहे मीठी सी कहानियाँ।

मीठी सी कहानियाँ हाँ मीठी सी कहानियाँ।।

काहे री सतावै मोह…।।

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