मुकदमा

गौर से देखना इस

हँसीन चेहरे को

कभी तुमने देखा

इस चैन भरी आँखों में आँसू ?

नहीं पिय देखा नहीं होगा ।

सच तो यह कि –

प्रतिदन दो बूंदे आँसू टपकते

तुमसे प्रेम करने‌ की

जुल्म जो  हमने कर दी….।

माफी की अर्जी भेजी अदालत में

मुकद्दमा लड रहे सपने सारे

कि – पिय आकर हमसे ना मिलते,

बाते न करते और गले नहीं लगाते।

तारीख पर तारीख पड रहे हैं

अब तक न्याय नहीं मिला ..!

राजी हो सकते‌ हैं अगर पिय चाहे तो

बस इसी‌ इंतजार में हूँ

कि – वह कब  आकर मुझसे

गले लगाकर बाहों में भर लेगा …..!

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