मोहे परदेसिया कै री पीर

मोहे परदेसिया कै री पीर,

दिल सखि झेलि न जाय।

झेलि न जाय सखि नयन बहाये।।

मोहे परदेसिया कै री पीर…।।

सांझ सबेरे मोहे, दर्द लगाए,

पल ही री मोरी सखि, याद न जाए।

कब हरिहौ बलम तन पीर।।

दिल सखि झेलि न जाऐ।।

मोहे परदेसिया कै री पीर…।।

बैन पिया कै मीठे, दिल मा चुभत है,

मोरे सैंया री सखि, मन का लुभत है।

अब जियरा भयो री है अधीर।।

दिल सखि झेलि न जाए।।

मोहे परदेसिया कै री पीर…।।

वाट निहारु सखि, जागूँ सारी रतिया,

ख़बरन भेजीपिय, लिख भेजीपतिया।

पिय धरो नहीं जात अब धीर।।

दिल सखि झेलि न जाए।।

मोहे परदेसिया कै री पीर…।।

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