याद करत हिय सजना

याद  करत  हिय  सजना,  संग  गोंइयाँ  कँगना ।

जग कै री कौनो सखि लोगना, लगेंनां मोहे सगेना।।

याद करत हिय सजना…।।

ऐ री पौनि मोरी बहना, पिय सन कहना।

आवें सजन मोरे भवना, ना चाहूँ गहना।।

याद करत हिय सजना…।।

गये परदेस सखि सजना, मोरा जिया लगेगा।

भूल न पाऊँ पल सजना, वो दिन अब रहे ना।।

याद करत हिय सजना…।।

याद करत मन कबना, पियर भई देहना।

रोवत सूखि गयो नयना, नीर अब बहेना।।

याद करत हिय सजना…।।

सह्मो नहीं जात अब अहना, विरह तन पहना।

आवैं न मरू सखि बरना, पिया सन कहेना।।

याद करत हिय सजना…।।

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