वचन बेच दिया उसने…

तन बेच दिया उसने, मन बेच दिया उसने

धन-सत्ता के लिए तो,अमन बेच दिया उसने…!

अवाम को क्या क्या नहीं वादे किए थे,सारे

दौलत औ हुकूमत को, वचन बेच दिया उसने….!

सिपाही भेज सरहद,दुश्मन को खबर दे दी

जयचंद घर का भेदी,वतन बेच दिया उसने…!

ताल- नदी -सड़कें-जंगल न रहे बाकी

सेठों से नकद लेके,चमन बेच दिया उसने…!

कर्तब्य का शपथ लिया था दुनिया के आगे …

इंसानियत के शव का कफन बेच दिया उसने…!

जनता के भरोसे का खूं बहा दिया सड़क पर

अल्ला-ईसा-नानक-औ किशन बेच दिया उसने..!

जिस कोख मे जन्मा,कलाई में बंधी राखी

औकात में आया.. माँ-बहन बेच दिया उसने..!!

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