विरही गजल

जब हम साथ होंगे,……..चाँद-तारे मुस्कुराएंगे

विरह में बीते-दिन-भीगी-गजल तुमको सुनाएंगे।।

तड़प कर गीत-सागर, उखड़ती सांसो ने जो लिखे

सीने से लगा, तफ़सील से….. गिन-गिन पढ़ाएंगे ।।

हमारे बिन न रह पाने की तकलीफ.तुम बता देना

तुम्हारे बिन गुजारे …सिसकते दिन हम बताएंगे।।

बिन मेरे गुजारी दिन औ रातें,तुम लिपट कहना

अधर पर रख अधर, वो वेदना हम-तुम मिटाएंगे।।

मिलेंगे जब भी हम-तुम,कोई भी-हिजाब न रखना

बस दीवानगी की …..हद्द से गुजरते जाएंगे।।

मुहब्बत की दहकती दावानल को, प्रेम की दरिया

डुबोकर,आग तन-मन की, कयामत तक बुझाएंगे।।

चलो तो प्यार के हम कुछ, ज़मीं पर बीज यूं बो दें

अम्बर से धरा,…….किस्से- मुहब्बत लहलहाएँगे।।

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