संघर्ष और नदी

नदियाँ बहती समन्दर में जा मिलती

नदियाँ बहती बहुत सन्देश दे जाती

नदियाँ बहती संघर्ष गाथा प्रस्तुत करती

नदियाँ बहती निस्वार्थ प्रेम गान भरती

नदी से पूछो क्यों बहती ?

नदी से पूछो क्या कहती ?

नदी से पूछो कितना संघर्ष जीवन पथ में

नदी से पूछो कितना प्रेम समन्दर से

नदी की नियति ही बहना तभी निरन्तर बहती

नदी का गान ही प्रेम-प्रेम का सुन्दर गान प्रस्तुत करती

नदी को नहीं मिला पथ स्वयं पथ का निर्माण करती

नदी समन्दर में अस्तित्व खो देती महान प्रेम का आर्दश दिखाती

चराचर प्रकृति आदर्श का आधार

चराचर प्रकृति प्रेरणा का आधार

जो प्रकृति का सच्चा सहचर

जीवन उसका आदर्श शिखर

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