सुबह मेरी

मेरे गीत के पंक्तियों में

सदा हँसने वाले सुबह के

चित चकोर रवि तुम ।

रम्य मनमोहक सृष्टि में

सदा खिलने वाली हँसीन

जलजा हो तुम ।

मस्ती में झुमने वाले

हवाओं के झोंकों में

लहराती गुलाब हो तुम ।

यादों के साथ जिंदगी में

चलने वाले मेरे मधुर

भावनाएं हो तुम ।

तारीफ़ करने वाले शब्दों में

सदा हँसते खिलते नविन

कविता हो तुम ।

पत्तों में इटलाते बैठे

आकर्षित वो ओस रूपी

 मोती हो प्रिय तुम ।

सुनहरे रंगीन किरणों में

उमंग भरने निकले

वो सूरज हो तुम ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *