हाँ .. मैं एक लड़का हूँ

रोता नहीं कभी भी मैं  ..        मगर दर्द मुझे भी होता हैं

दिखाता नहीं किसी को मैं ..  महसूस मुझे भी होता हैं  

फ़िक्र मुझे उतनी ही हैं ..       जितना मैं सबसे कहता हूँ

हाँ .. मैं एक लड़का हूँ …     और मैं सब कुछ सहता हूँ

अंदर मेरे एक बेटा हैं ..       और अंदर मेरे एक बाप हैं

मेरी भी ख्वाहिशें हैं ..         और मेरे भी कुछ ख़्वाब हैं 

बहुतो की महफ़िल हूँ मैं  ..  पर खुद अकेला रहता हूँ

हाँ .. मैं एक लड़का हूँ ..     और मैं सब कुछ सहता हूँ

माँ का दुलारा बेटा हूँ मैं ..    और हूँ किसी का सुहाग भी

ठंडी नरम बर्फ़ सा हूँ मैं  ..    कभी हूँ भभकती आग भी

रुक जाता हूँ पत्थर जैसे .. कभी कलकल करके बहता हूँ

हाँ ..  मैं एक लड़का हूँ ..     और मैं सब कुछ सहता हूँ

रावण हूँ मैं कही कही पर ..      और कही पर राम भी हूँ

उगता उजाला हूँ कही पर  ..   कही पर ढलती शाम भी हूँ

कभी सुनता रहता अर्जुन सा मैं..कभी क्रिशन सा कहता हूँ

हाँ .. मैं एक लड़का हूँ ..   और मैं सब कुछ सहता हूँ

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