हिम्मत रख

ये वक्त ही तो हैं..गुज़र जाएगा

माना हर तरफ़ घुप्प अंधेरा हैं

धुंधला सा कही दूर सवेरा हैं

हिम्मत को अभी झुकने ना देना

उम्मीद का दिया बुझने न देना

ये काला बादल छट जाएगा

उजला सूरज फिर नज़र आएगा

हिम्मत रख

ये वक्त ही तो हैं .. गुज़र जाएगा  

एक साया साथ चलने लगा हैं

इंसान ही इंसान से डरने लगा हैं…

चारों तरफ़ हाहाकार मचा हैं

लाशों का अम्बार लगा हैं…

बेबस आँखे बरस रही हैं

अर्थी काँधे को तरस रही हैं…

जो जो ना सोचा वो होने लगा हैं

जो जो ना सोचा वो होने लगा हैं

देख टूटी चूड़ी ..बिलखते बच्चे

जलती चितायें .. रोती माएँ

खुद शमशान भी अब रोने लगा हैं..

और कह रहा हैं यें उड़ता धुआँ

यह मंज़र भी यूँ ही चला जाएगा 

हिम्मत रख

ये वक्त ही तो है ..गुज़र जाएगा

क्या रोक पाई है चट्टाने कभी बहते पानी को

क्या रोक पाया है अंधेरा कभी उगते सवेरों को

क्या कभी तूफानो में छोड़ा है उड़ना इन पंछियो ने

छोड़ो निराशा रखो उस से आशा

जिसने इस जहाँ में जीवन दिया है

पत्ते फिर पेड़ो पर नए आएंगे

नये सवेरे नई किरणों को लाएंगे

दुख का ये बादल जल्द छंट जाएगा

हिम्मत रख

ये वक़्त ही तो है गुज़र जाएगा

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