आज से ही चलना होगा

जो वक़्त हैं आज साथ में   वो हाथ मे कल ना होगा पानी हैं मंज़िल कल तुम्हें तो आज से ही चलना होगा चमकना हैं अगर कुंदन सा तो तेज़ आग मे तपना होगा गर सारे सपने करने पूरे तो नींद से अब जगना होगा … पानी हैं मंज़िल कल तुम्हें तो आज से …

कुछ शायरी

1. कल फिर लिखी एक ख़्वाहिश..और जला दी ज़िंदगी के एक और ख़्वाब को आग लगा दी 2. बे तरतीब थी ज़िंदगी..अब कुछ यूँ सज़ा रखी हैं सिर्फ़ एक ज़ेब में नोट.. बाक़ी में दुआएँ कमा रखी हैं 3. दिल्लगी के लिए एक सबाब ज़रूर करना मिले जो कही पुराना आशिक़ उसे आदाब ज़रूर करना …

दूर निकल आया हूँ

ढूँढते ढूँढते किसी को खुद कों खो आया हूँ ..चलते चलते मैं बहुत दूर निकल आया हूँ …चले तो थे ऐसे के जल्द लौट आएँगे वापस आकर फिर से आशियाँ सजाएँगे सजाते सजाते एक आशियाँ उजाड़ आया हूँ चलते चलते मैं बहुत दूर निकल आया हूँ मंज़िल से निकला था मंज़िल ही ढूँढने उजाले में …

हाँ .. मैं एक लड़का हूँ

रोता नहीं कभी भी मैं  ..        मगर दर्द मुझे भी होता हैं दिखाता नहीं किसी को मैं ..  महसूस मुझे भी होता हैं   फ़िक्र मुझे उतनी ही हैं ..       जितना मैं सबसे कहता हूँ हाँ .. मैं एक लड़का हूँ …     और मैं सब कुछ सहता हूँ अंदर मेरे एक बेटा हैं ..       और अंदर …

हिम्मत रख

ये वक्त ही तो हैं..गुज़र जाएगा माना हर तरफ़ घुप्प अंधेरा हैं धुंधला सा कही दूर सवेरा हैं हिम्मत को अभी झुकने ना देना उम्मीद का दिया बुझने न देना ये काला बादल छट जाएगा उजला सूरज फिर नज़र आएगा हिम्मत रख ये वक्त ही तो हैं .. गुज़र जाएगा   एक साया साथ चलने …

कलम तेरी आज़ाद हैं

लिख तू अपनी मुफ़लिसी या लिख तू अपनी बादशाहत जा कलम तेरी आज़ाद हैं लिख तू अपने सारे दर्द या लिख तू अपनी मुस्कुराहट ..जा कलम तेरी आज़ाद हैं लिख तू राह के सारे काँटे या लिख तू अपनी मंज़िले जा कलम तेरी आज़ाद हैं लिख तू अपनी भूली चाहत या लिख तू अपनी नयी …

ऐ ज़िंदगी…आ हिसाब करें

ए ज़िंदगी आ बैठ तुझसे कुछ बात करे आज तुझसे तेरा ही हिसाब करे कहते चार दिन की तेरी उमर हैं ..पर बहुत बड़ी तू सौदागर हैं बहुत ख़ुशी बहुत ग़म दिए हैं ..मेरी होकर मुझसे ही सौदे किए हैं कहते लिखा हैं पहले से तुझमें सब ..और तू एक खुली किताब हैं  क्या खोना …